अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर देहरादून में भव्य योग व मेंटल वेलनेस शिविर का आयोजन, “विचार-एक नई सोच” संस्था योग के साथ मानसिक स्वास्थ्य को दे रही है नई दिशा

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देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई “फिट इंडिया” और “थोड़ा तेल-चीनी कम” जैसी जन-जागरूकता मुहिमों को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है सामाजिक संस्था “विचार -एक नई सोच”। यह संस्था विगत कई वर्षों से योग, ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से कार्यरत है। इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर संस्था द्वारा एक वृहद योग एवं मेंटल वेलनेस शिविर का आयोजन मोथरोवाला केदारपुरम् स्थित एक निजी शैक्षणिक संस्थान में किया गया।शिविर में सैकड़ों की संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लेकर योग और मानसिक संतुलन के विभिन्न आयामों से जुड़ाव महसूस किया।

कार्यक्रम की शुरुआत संस्था के संरक्षक अरुण शर्मा, अध्यक्ष अरुण चमोली और सचिव राकेश बिजल्वाण ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर की। वक्ताओं ने प्रधानमंत्री मोदी के उस संकल्प की सराहना की, जिसमें योग को विश्व पटल पर भारत की प्राचीन परंपरा के रूप में स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को लचीला बनाना नहीं, बल्कि मन, आत्मा और ऊर्जा केंद्रों को जागृत करने की साधना है।

योग, ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य शिविर में प्रमुख आकर्षण रहे संस्था से जुड़े मेंटल वेलनेस कोच एवं ग्रैंड मास्टर गणेश काला, जिन्होंने प्रतिभागियों को “भावनात्मक मुक्ति तकनीक”/ “टैपिंग थैरेपी” और मास एनर्जी हीलिंग की सरल लेकिन प्रभावशाली क्रियाओं का अभ्यास करवाया। गणेश काला ने वैज्ञानिक शोधों का हवाला देते हुए कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी अब यह स्वीकार कर चुका है कि लगभग 90 प्रतिशत बीमारियाँ साइकोसोमैटिक होती हैं, यानी उनका मूल कारण हमारे मन और विचार होते हैं। जब हम नकारात्मक विचारों, बीते अनुभवों, दबे हुए भावों या अवांछनीय विश्वासों को अपने भीतर लगातार संजोए रखते हैं, तो वे हमारी ऊर्जा प्रणाली को बाधित करते हैं और धीरे-धीरे हमारे शरीर की कोशिकाओं पर विपरीत प्रभाव डालते हैं।

गणेश काला ने स्पष्ट किया कि जब तक हम अपने अंतर्मन की सफाई, यानी अपने भीतर छिपे भावनात्मक ज़हर और मानसिक जाल को नहीं हटाते, तब तक कोई भी शारीरिक चिकित्सा या उपचार स्थायी रूप से सफल नहीं हो सकता। यही कारण है कि अब चिकित्सा जगत में भी मेंटल हीलिंग और ऊर्जा संतुलन (एनर्जी बैलेंसिंग) की तकनीकों की भूमिका को विशेष महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने आगे बताया कि “भावनात्मक मुक्ति तकनीक”/ “टैपिंग थैरेपी” और मास एनर्जी हीलिंग जैसी विधियाँ हमारे शरीर के क्वांटम लेवल यानी सूक्ष्म ऊर्जा स्तर पर कार्य करती हैं। इन तकनीकों के माध्यम से हम अपने ऊर्जा केंद्रों (चक्रों) को सक्रिय और संतुलित कर सकते हैं, जिससे न केवल मानसिक राहत मिलती है, बल्कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली, एकाग्रता, और आंतरिक ऊर्जा में भी अद्भुत सुधार होता है। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे योग के साथ-साथ मेंटल हीलिंग प्रैक्टिसेस को भी अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं ताकि वे सचमुच एक संपूर्ण और संतुलित जीवन जी सकें तन, मन और आत्मा के स्तर पर।

कार्यक्रम में योगाचार्य तनुजा रावत ने विभिन्न शारीरिक योग क्रियाओं का अभ्यास कराया और प्रतिभागियों को योग को दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि योग केवल आसनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवनशैली है, जो व्यक्ति को समग्र रूप से स्वस्थ बनाती है शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्तर पर।

संस्था के अध्यक्ष अरुण चमोली ने कहा हमारा उद्देश्य केवल योग सिखाना नहीं, बल्कि हर वर्ग के लोगों को मानसिक रूप से भी मजबूत बनाना है। विचार एक नई सोच का यह प्रयास है कि हम शरीर, मन और आत्मा तीनों को संतुलन में लाएं, ताकि समाज संपूर्ण रूप से स्वस्थ हो। इस अवसर पर रमन जायसवाल, अवधेश नौटियाल, कुलदीप सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। शिविर का समापन सामूहिक ध्यान व ऊर्जा संप्रेषण के साथ किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने गहन मानसिक शांति व ऊर्जावान अनुभूति का अनुभव किया।

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