वर्जिन हाइपरलूप ने यात्रियों के साथ पहली टेस्टिंग की, 172 किमी प्रति घंटा तक पहुंची स्पीड

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नई दिल्ली :

वर्जिन ने बिना यात्री हाइपरलूप पॉड के 400 टेस्ट किएअमेरिका में 2030 तक शुरू हो सकता है ऑपरेशनरिचर्ड ब्रैन्सन की कंपनी वर्जिन हाइपरलूप ने अपने हाईस्पीड पॉड सिस्टम की यात्रियों के साथ पहली टेस्टिंग की।

इस सफर में वर्जिन हाइपरलूप के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर जोश गेगल और डायरेक्टर पैसेंजर एक्सपीरियंस सारा लुचियन शामिल हुए। पॉड की मैक्सिमम स्पीड 172 किमी प्रति घंटा रही। यह टेस्टिंग अमेरिका के नेवादा राज्य के लॉस वेगास में बनाई गई साइट पर की गई।966 किमी प्रति घंटे से ज्यादा हो सकती है रफ्तारलॉस एंजिल्स की कंपनी हाइपरलूप ने भविष्य के लिए पॉड बेस्ड ट्रेन सिस्टम बनाया है। यह एक वैक्यूम ट्यूब सिस्टम पर चलता है। इसकी स्पीड 966 किमी प्रति घंटे से ज्यादा हो सकती है।

पहली पैसेंजर टेस्टिंग के मौके पर वर्जिन हाइपरलूप के चेयरमैन सुल्तान अहमद बिन सुलेयम ने कहा, ‘मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है कि मैं आंखों के सामने इतिहास बनते देख रहा हूं।’लंबे समय से चल रही है टेस्टिंगवर्जिन हाइपरलूप अपने पॉड आधारित यात्रा सिस्टम की लंबे समय से टेस्टिंग कर रही है। नेवादा साइट पर बिना यात्रियों के इसकी करीब 400 टेस्टिंग हो चुकी हैं।

अमेरिका में सबसे पहले न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन के बीच हाइपरलूप ट्रेन सिस्टम चलाया जाना है। इस सिस्टम के चलने के बाद वॉशिंगटन से न्यूयॉर्क का सफर महज 30 मिनट में हो सकेगा। यह पॉड सिस्टम कमर्शियल जेट फ्लाइट से दोगुना और हाईस्पीड ट्रेन से 4 गुना तेज है।वर्जिन हाइपरलूप की नेवादा स्थित टेस्टिंग साइट।अमेरिका में 2030 तक दौड़ सकती है पहली हाइपरलूप ट्रेनकंपनी इस सिस्टम पर तेजी से काम कर रही है। 2025 तक कंपनी सेफ्टी सर्टिफिकेट ले सकती है। 2030 तक अमेरिका में पहली हाइपरलूप ट्रेन चलाने की योजना है। कनाडा का ट्रांसपॉड और स्पेन के जेलेरोस भी हाइपरलूप की तर्ज पर तेज सफर वाला सिस्टम बना रहे हैं।

भारत में कई रूट पर हाइपरलूप चलाने की योजनासफर को आसान और जल्द पूरा करने के लिए भारत में भी कई रूट्स पर हाइपरलूप ट्रेन चलाने की योजना बनाई जा रही है। इसमें मुंबई-पुणे, बेंगलुरु सिटी से बेंगलुरु एयरपोर्ट, अमृतसर से चंडीगढ़, भोपाल से इंदौर-जबलपुर रूट शामिल हैं।कैसे काम करता है हाइपरलूप पॉडहाइपरलूप पॉड को खास ट्यूब्स या सुरंगों के भीतर चलाया जाता है। जिन ट्यूब्स या सुरंगों के भीतर से पॉड्स चलाया जाता है, उनमें से हवा को पूरी तरह से निकाल (वैक्यूम) दिया जाता है, ताकि घर्षण न हो। घर्षण रफ्तार को कम करता है, उसकी गैर-मौजूदगी में ये पॉड 1200 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से यात्रा कर सकेंगे। इन पॉड्स में पहिए नहीं होते और वे खाली स्थान में तैरते हुए आगे बढ़ते हैं।

पहले सफर के दौरान पॉड में बैठे अमेरिकी कंपनी वर्जिन हापइरलूप के एक्जीक्यूटिव। फोटो क्रडिट ट्विटर

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