मकर संक्रान्ति: जानें कैसे करें पूजा अर्चना

0
p-3

साल की शुरुआत के साथ ही त्योहारों का मौसम भी शुरू हो गया है. जनवरी में दो प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं मकर संक्रांति और लोहड़ी. भारत में इन दोनों ही पर्व का खास महत्व है। सनातन धर्म में संक्रांति, पूर्णिमा और अमावस्या तिथियों पर गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान का विधान है। ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा और अमावस्या तिथियों को गंगा स्नान करने से व्यक्ति के समस्त पाप कट जाते हैं। साथ ही इन तिथियों को तिल तर्पण और दान से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करके खिचड़ी खाई और दान दक्षिणा की जाती है. इस पावन पर्व पर गरीबों में कम्बल और ऊनी वस्त्र का दान करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है. दरअसल सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं. जब सूर्य गोचरवश भ्रमण करते हुए मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब इसे मकर-संक्रांति कहा जाता है।
मकर संक्रांति का मुहूर्त शुरु होने के बाद जल्द से जल्द स्नान करने शुभ माना जाता है. सूर्योदय से ठीक पहले यानी ब्रम्ह मुहूर्त में स्नान करने से विशेष फल मिलता है् इस दिन आराध्य देवता की पूजा करने के बाद तिल के लड्डू और खिचड़ी खानी चाहिए।

संगम किसे कहते हैं

धार्मिक मान्यता है कि जिस जगह पर तीन नदियों का मिलन होता है। उस जगह को संगम और त्रिवेणी भी कहा जाता है। भारत में दर्जनों नदियां हैं। इनमें कई नदियां आपस में मिलती है। प्रयागराज संगम पर गंगा, यमुना और सरस्वती मिलती हैं। सनातन धर्म में गंगा को पवित्र नदी माना गया है। इसके बाद अन्य नदियों का स्थान है। राजा सगर के पुत्रों को मोक्ष दिलाने हेतु मां पार्वती गंगा रूप में पृथ्वी पर अवतरित हुई। सनातन शास्त्रों में निहित है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा पृथ्वी पर आई। इसके लिए मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान का विधान है। वहीं, प्रयागराज संगम में स्नान करने से भी मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके लिए मकर संक्रांति पर प्रयागराज संगम में स्नान किया जाता है।

कहां-कहां लगाते हैं श्रद्धालु आस्था की डुबकी

श्रद्धालु गंगासागर, बिहार के सुल्तानगंज, प्रयागराज, हरिद्वार, ऋषिकेश और वाराणसी में आस्था की डुबकी लगाते हैं। हालांकि, कोरोना महामारी के चलते गंगा स्नान करना संभव है। अतः श्रद्धालु घर पर गंगाजल युक्त पानी से स्नान ध्यान कर सकते हैं। साथ ही तिलांजलि दें। वहीं, पूजा पाठ करने के बाद गरीबों और जरुरतमंदों को दान दें।

संक्रांति पर इन गलतियों से बचें-

    • सूर्य को जल लोहे ,स्टील या प्लास्टिक के पात्र से मत दें.
    • घर में कोई भी सदस्य कहीं भी मांसाहारी भोजन कदापि मत करे.
    • शराब का सेवन घर का कोई भी सदस्य कहीं नहीं करेगा.
    • धूम्रपान भी वर्जित है ।घर पर बनने वाले भोजन में लहसुन और प्याज ना डालें. केवल खिचड़ी बनाएं और वही खाएं
    • पूरे दिन नए या एकदम साफ कपड़े धारण करें.गंदे कपड़े कदापि मत पहनें. प्रयास करें कि असत्य मत बोलें.
    • ब्रम्हचर्य का पालन आवश्यक है । किसी की निन्दा न करें
      इन मंत्रो का करें उच्चारण
      श्री गणेश गायत्री मंत्र- तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ति प्रचोदयात्
      श्री शिव गायत्री मंत्र- महादेवाय विद्महे रुद्रमूर्तये धीमहि तन्नो शिव प्रचोदयात
      श्री विष्णु गायत्री मंत्र- श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु: प्रचोदयात
      महालक्ष्मी गायत्री मंत्र- महालक्ष्मयै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात
      सूर्य गायत्री मंत्र-भास्कराय विद्महे महातेजाय धीमहि तन्नो सूर्य प्रचोदयात

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed